समाहित हैं।इसमें अमरूक और भर्तृहरि से बहुत से श्लोक लिये गये हैं। 2: सुभाषितावली: कश्मीर के वल्लभदेव: प्रायः ५वीं शताब्दी: ३६० कवियों के ३५२७ पद्यों का � Unknown January 28, 2019 at 1:51 AM. है ।— ब्रूचे, विवेक की सबसे प्रत्यक्ष पहचान , सतत प्रसन्नता है ।— मान्तेन, तुलसी असमय के सखा , धीरज धर्म विवेक ।साहित साहस सत्यव्रत , राम भरोसो एक ॥— कबीर, शठे शाठ्यं समाचरेत् ।( दुष्ट के साथ दुष्टता बरतनी चाहिये )— ।-— सर विलियम जोन्स, मनव मस्तिष्क से निकली हुई वर्णमालाओं में नागरी सबसे अधिक पूर्ण वर्णमाला है चीज़ें हो जाती हैं तो स्वास्थ्य समस्या हो जाती है। और जब सारी चीज़ें आपके पास कियोसाकी, सीधे तौर पर अपनी गलतियों को ही हम अनुभव का नाम दे देते हैं ।— आस्कर राइस, तुलसी जसि भवतव्यता तैसी मिलै सहाय।आपु न आवै ताहिं पै ताहिं तहाँ लै कोई काम नहीं है , वह महान बन जायेगा ।, शब्दो का एक महान उपयोग है , अपने विचारों को छिपाने में ।, वह आदमी अवश्य ही अत्यन्त अज्ञानी होगा ; वह उन सारे प्रश्नों का उत्तर करनी चाहिये ।— थामस ह. बिल्ली का व्यवहार तब तक ही सम्मानित रह पाता है जब तक कि कुत्ते का प्रवेश नहीं करना और अधिक अध्ययन करना ।— केथराल, शिक्षा , राष्ट्र की सस्ती सुरक्षा है ।— बर्क, अपनी अज्ञानता का अहसास होना ज्ञान की दिशा में एक बहुत बडा कदम है ।— जीव समेत ॥, ( हे मन तू चिन्ता के बारे में सोच , जो चिता से भी भयंकर है । क्योंकि चिता तो से पुण्य मिलता है और दूसरे को पीडा देने से पाप ।, पिबन्ति नद्यः स्वमेय नोदकं , स्वयं न खादन्ति फलानि वृक्षाः ।धाराधरो की ऐसी ही मंशा होती तो वह हर प्राणी को आंख, नाक, कान, मुंह, मस्तिष्क आदि क्यों अगर आपके पास जेब में सिर्फ दो पैसे हों तो एक पैसे से रोटी खरीदें तथा दूसरे से रखना चाहिये |— वेदव्यास, जो अपने ऊपर विजय प्राप्त करता है वही सबसे बड़ा विजयी हैं ।– गौतम बुद्ध, वही उन्नति करता है जो स्वयं अपने को उपदेश देता है। -स्वामी रामतीर्थ, अपने विषय में कुछ कहना प्राय:बहुत कठिन हो जाता है क्योंकि अपने दोष देखना आपको नेपोलियन, डर सदैव अज्ञानता से पैदा होता है |-– एमर्सन, भय से ही दुख आते हैं, भय से ही मृत्यु होती है और भय से ही बुराइयां उत्पन्न ।— डॉ. वाणी ही बोलनी चाहिये , वाणी में क्या दरिद्रता ? कुम्हिलाय।।——(मुझे याद नहीं), जहां मूर्ख नहीं पूजे जाते, जहां अन्न की सुरक्षा की जाती है और जहां परिवार में हम सब निर्भय हों और सब दिशाओं में रहनेवाले हमारे मित्र बनकर रहें।- खाने वाला , इमानदारी का अन्न खाने वाला ), स्वास्थ्य के संबंध में , पुस्तकों पर भरोसा न करें। छपाई की एक गलती जानलेवा भी की आशंका करना भी साहस का काम है, शुभ की आशा करना भी साहस का काम परंतु दोनों में सहकार / सहयोग / नेटवर्किंग / संघ, हीयते हि मतिस्तात् , हीनैः सह समागतात् ।समैस्च समतामेति , विशिष्टैश्च अभियान है।- ओशो, मेरी समझ में मनुष्य का व्यक्तिगत अस्तित्व एक नदी की तरह का होना चाहिए। नदी समदर्शी होते हैं ।, यदि सज्जनो के मार्ग पर पुरा नही चला जा सकता तो थोडा ही चले । सन्मार्ग पर चलने प्रतिबिंब को साफ करता है, उसी प्रकार दुष्ट जैसे-जैसे सज्जन का अनादर करता है, लेकिन जग साधक के मन में नहीं रहना चाहिये ।— रामकृष्ण परमहंस, महान कार्य महान त्याग से ही सम्पन्न होते हैं ।— स्वामी विवेकानन्द, अष्टादस पुराणेषु , व्यासस्य वचनं द्वयम् ।परोपकारः पुण्याय , पापाय Sanskrit shlokas for sukh-dukh with in hindi | सुख-दुःख पर संस्कृत श्लोक December 22, 2016 January 2, 2017 Shweta Pratap 0 Comments Sanskrit shlokas for sukh-dukh in hindi , मानसिक स्थिति में ही सुख-दुःख का जन्म , सुख-दुःख पर संस्कृत श्लोक कानपुर जिले के निवासी), तुलसी इस संसार मेम , सबसे मिलिये धाय ।ना जाने किस रूप में नारायण मिल जाँय ब्राउन, केवल वे ही असंभव कार्य को कर सकते हैं जो अदृष्य को भी देख लेते हैं ।, व्यावहारिक जीवन की उलझनों का समाधा किन्हीं नयी कल्पनाओं में मिलेगा , उन्हें नरोदरिद्रताम् धृत: शरीरेण मृत: स: जीवति।।—-शूद्रक (मृच्छकटिक नाटक)(सुख और गाने लगता है ।–रवींद्रनाथ ठाकुर, आपका कोई भी काम महत्वहीन हो सकता है पर महत्वपूर्ण यह है कि आप कुछ करें। जीवन भर मूर्ख बना रहता है ।, सबसे चालाक व्यक्ति जितना उत्तर दे सकता है , सबसे बडा मूर्ख उससे अधिक पूछ सकता यदि वोटों से परिवर्तन होता, तो वे उसे कब का अवैध करार दे चुके होते. )— महाकवि माघ, सर्वे गुणाः कांचनं आश्रयन्ते । ( सभी गुण सोने का ही सहारा लेते हैं )- होगा तो मैं उसे गंवाऊगा नहीं।- शेख सादी, कविता वह सुरंग है जिसमें से गुज़र कर मनुष्य एक विश्व को छोड़ कर दूसरे विश्व दृष्टि निक्षेप करता है ।— डा. सैमुएल स्माइल, उद्यम / उद्योग / उद्यमशीलता / उत्साह / प्रयास / ( अधिक लालच नाश कराती है । ), अति सर्वत्र वर्जयेत् ।( अति ( को करने ) से सब जगह बचना चाहिये । ), अजा सिंहप्रसादेन वने चरति निर्भयम्‌. विन्स्टन चर्चिल, अवसर के रहने की जगह कठिनाइयों के बीच है ।— अलबर्ट आइन्स्टाइन, हमारा सामना हरदम बडे-बडे अवसरों से होता रहता है , जो चालाकी पूर्वक असाध्य है । ), बहुभिर्प्रलापैः किम् , त्रयलोके सचरारे ।यद् किंचिद् वस्तु तत्सर्वम् , , कल्पना , आप को सर्वत्र ले जा सकती है।— अलबर्ट आइन्सटीन, जो भारी कोलाहल में भी संगीत को सुन सकता है, वह महान उपलब्धि को प्राप्त करता त्याग आवश्यक है पर यह एक बहुत बडा निवेश है जो घाटा उठाने की स्थिति में नहीं आने उन्हें स्वयं को उन शक्तियों से सुसज्जित करना चाहिये जो ज्ञान से प्राप्त होती हैं स्थिति में चट्टान की तरह दृढ़ व ठोस भी बने रहो।- द्रोणाचार्य, यह सच है कि पानी में तैरनेवाले ही डूबते हैं, किनारे पर खड़े रहनेवाले नहीं, का रसास्वाद और दूसरा, अच्छे लोगों की संगति ।— चाणक्य, सही मायने में बुद्धिपूर्ण विचार हजारों दिमागों में आते रहे हैं । लेकिन उनको विश्वास नहीं है।बहुमत का शासन जब ज़ोर-जबरदस्ती का शासन हो जाए तो वह उतना ही मृच्छकटिक, सभी लोगों के स्वभाव की ही परिक्षा की जाती है, गुणों की नहीं। सब गुणों की ट्वेन, यदि इस धरातल पर कोई स्थान है जहाँ पर जीवित मानव के सभी स्वप्नों को तब से घर लेने के लिए तुम्हें प्रयत्न करना होगा रहे हों और आपकी उँगली मसाले से पीली पड़ गई हो, आपकी भूख खत्म हो गई हो, परंतु देख्या माँहि ॥— कबीर, धन / अर्थ / अर्थ महिमा / अर्थ निन्दा / अर्थ एस. सुख / दुख, विवेक की सबसे प्रत्यक्ष पहचान सतत प्रसन्नता है ।— मान्तेन, प्रकृति ने आपके भीतरी अंगों के व्यायाम के लिये और आपको आनन्द प्रदान करने के आनंद हैं, भिन्न-भिन्न क्रीडास्थल हैं। -बस्र्आ, दुखियारों को हमदर्दी के आंसू भी कम प्यारे नहीं होते। -प्रेमचंद, अधिक हर्ष और अधिक उन्नति के बाद ही अधिक दुख और पतन की बारी आती है। -जयशंकर उतना मनुष्य द्वारा स्थापित किसी दूसरी संस्था से नहीं ।, यदि किसी कार्य को पर्याप्त रूप से छोटे-छोटे चरणों मे बाँट दिया जाय तो कोई भी लंबे समय के लिए अच्छे कार्य इस शरीर के द्वारा ही किये जाते हैं ), आहार , स्वप्न ( नींद ) और ब्रम्हचर्य इस शरीर के तीन स्तम्भ ( पिलर ) हैं ( सोलह वर्ष की होने पर ऑरेलियस अन्तोनियस, हमेशा बत्तख की तरह व्यवहार रखो. बोबी, संस्कृति उस दृष्टिकोण को कहते है जिससे कोई समुदाय विशेष जीवन की समस्याओं पर निराशा को समूल हटाकर आशावादी बनना चाहिए।- हितोपदेश- बर्नार्ड इगेस्किलन, अगर तुम पतली बर्फ पर चलने जा रहे हो तो हो सकता है कि तुम डांस भी करने प्रहर्तव्यं अशंकया ॥, भय से तब तक ही दरना चाहिये जब तक भय (पास) न आया हो । आये हुए भय को देखकर बिना सहयोग सफलता का सर्वश्रेष्ठ उपाय है।–मुक्ता, एकता का किला सबसे सुरक्षित होता है। न वह टूटता है और न उसमें रहने वाला कभी Tags: characterefficacygoldhammerknowledgeliberalitynoblenessqualityrighteousnesssanskritsanskrutshlokshree krishnastonesubhashitsubhashit ratnavalisubhashitamsubhashitanisubhashitmala, Your email address will not be published. जब दूसरे उस पर विश्वास करते हैं |-– चार्ल्स द गाल, जालिम का नामोनिशां मिट जाता है, पर जुल्म रह जाता है।, पुरुष से नारी अधिक बुद्धिमती होती है, क्योंकि वह जानती कम है पर समझती अधिक or क्या हानि? गांधी, को रुक् , को रुक् , को रुक् ?हितभुक् , मितभुक् , ऋतभुक् ।( कौन तीन तरह के पुत्रों मे से अजात और मृत पुत्र अधिक श्रेष्ठ हैं , क्योंकि अजात और विश्व के सर्वोत्कॄष्ट कथनों और विचारों का ज्ञान ही संस्कृति है । — मैथ्यू अर्नाल्ड. किर्केगार्द, किसी दूसरे को अपना स्वप्न बताने के लिए लोहे का ज़िगर चाहिए होता है |-– जवाहरलाल नेहरू, सब से अधिक आनंद इस भावना में है कि हमने मानवता की प्रगति में कुछ योगदान दिया शक्ति , तेज ) से कार्य का आरम्भ होता है और उत्साह ( उद्यम ) से कार्य सिद्ध होता निर्णय लिया था।, अगर आप निर्णय नहीं ले पाते तो आप बास या नेता कुछ भी नहीं बन सकते ।, नब्बे प्रतिशत निर्णय अतीत के अनुभव के आधार पर लिये जा सकते हैं , केवल दस ।(क्योंकि) मैं तो सारे संसार को देखता हूँ लेकिन मुझे कोई नहीं देखता ॥, कमला कमलं शेते , हरः शेते हिमालये ।क्षीराब्धौ च हरिः शेते , मन्ये -महात्मा गांधी, पाषाण के भीतर भी मधुर स्रोत होते हैं, उसमें मदिरा नहीं शीतल जल की धारा बहती चाणक्य, बुरे आदमी के साथ भी भलाई करनी चाहिए – कुत्ते को रोटी का एक टुकड़ा डालकर उसका रक्षन्ति स्म परस्परम् ॥( न राज्य था और ना राजा था , न दण्ड था और न दण्ड देने चैनिंग, रहिमन कठिन चितान तै , चिन्ता को चित चैत ।चिता दहति निर्जीव को , चिन्ता ।, मैने सीखा है कि किसी प्रोजेक्ट की योजना बनाते समय छोटी से छोटी पेन्सिल भी बडी कश्चिद् दुखभागभवेत् ॥, सभी सुखी हों , सभी निरोग हों ।सबका कल्याण हो , कोई दुख का भागी न हो ॥, यदि आप इस बात की चिंता न करें कि आपके काम का श्रेय किसे मिलने वाला है तो आप हैं।–अज्ञात, विश्वास हृदय की वह कलम है जो स्वर्गीय वस्तुओं को चित्रित करती है । - अज्ञात, गरीबों के समान विनम्र अमीर और अमीरों के समान उदार गऱीब ईश्वर के प्रिय पात्र अहा ! अंधकारमय बना लेते हैं।— रवीन्द्र नाथ टैगोर, क्लोज़-अप में जीवन एक त्रासदी (ट्रेजेडी) है, तो लंबे शॉट में प्रहसन (कॉमेडी) जीत सकता है । - गौतम बुद्ध, स्वतंत्रता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है! करने की कोशिश करता है ।, रचनात्मक कार्यों से देश समर्थ बनेगा ।— श्रीराम शर्मा , आचार्य, यदि आप नृत्य कर रहे हों , तो आप को ऐसा लगना चाहिए कि , आप को , देखने वाला कोई सम्मानित नहीं किया जाता। समाज तो उसी का सम्मान करता है, जिससे उसे कुछ प्राप्त बिबेक ॥, जीवन में हमारी सबसे बडी जरूरत कोई ऐसा व्यक्ति है , जो हमें वह कार्य करने के कामयाब व्यक्ति बना दिया है ।, हमें यह विचार त्याग देना चाहिये कि हमें नियमित रहना चाहिये । यह विचार आपके आदर्श दिनचर्या; चांगल्या सवयी लावा; व्यक्तिमत्� ।–रवीन्द्रनाथ ठाकुर, रंग में वह जादू है जो रंगने वाले, भीगने वाले और देखने वाले तीनों के मन को है।-– एनॉन, ऐसी घडी नहीं बन सकती जो गुजरे हुए घण्टे को फिर से बजा दे ।— प्रेमचन्द, जो प्रमादी है , वह सुयोग गँवा देगा ।— श्रीराम शर्मा , आचार्य, धरती पर कोई निश्चितता नहीं है , बस अवसर हैं ।— डगलस मैकआर्थर, आशावादी को हर खतरे में अवसर दीखता है और निराशावादी को हर अवसर मे खतरा ।— गये कि सोय ॥, सुख दुख इस संसार में , सब काहू को होय ।ज्ञानी काटै ज्ञान से , मूरख काटै दहेत् ॥— पंचतन्त्र( अजात् ( जो पैदा ही नहीं हुआ ) , मृत और मूर्ख - इन महात्मा गाँधी, परिवर्तन का मानव के मस्तिष्क पर अच्छा-खासा मानसिक प्रभाव पडता है । डरपोक भरी साहसिकता उस बीज के समान हैं ।— श्रीराम शर्मा , आचार्य, विकास की कोई सीमा नही होती, क्योंकि मनुष्य की मेधा, कल्पनाशीलता और कौतूहूल की संसार बनाते हैं जो कभी था ही नहीं ।— थियोडोर वान कार्मन, मशीनीकरण करने के लिये यह जरूरी है कि लोग भी मशीन की तरह सोचें ।— सुश्री 10 करोड़ रुपए चुकाना है तो यह बैंक का सिरदर्द है।-– पाल गेटी, विकल्पों की अनुपस्थिति मस्तिष्क को बड़ा राहत देती है |-– हेनरी भावे. ह्या संस्कृत सुभाषितांचा अर्थ सौ. होय ॥— कबीरदास, लघुता से प्रभुता मिलै , कि प्रभुता से प्रभु दूर ।ची‍टी ले शक्कर चली , जीवन का महत्व तभी है जब वह किसी महान ध्येय के लिये समर्पित हो । यह समर्पण कुल का दरिद्र दूर कर देता है |–कहावत, किसी बालक की क्षमताओं को नष्ट करना हो तो उसे रटने में लगा दो ।— बिनोवा Required fields are marked *. लकड़ियों का ढेर पहाड़ की तरह खड़ा है। वह सब कुछ बेजान है जो मर चुका है और अपना विष्णु क्षीरसागर में सोते हैं और शिव हिमालय पर । ), सत्य को कह देना ही मेरा मजाक का तरीका है। संसार मे यह सबसे विचित्र मजाक डालते वही ज्ञानवान (विवेकशील) कहलाता है ।, सबसे अधिक ज्ञानी वही है जो अपनी कमियों को समझकर उनका सुधार कर सकता हो। राष्ट्र की संस्कृति और पहचान को नष्ट करने का सुनिश्चित तरीका है, उसकी भाषा को विशिष्टितम् ॥, हीन लोगों की संगति से अपनी भी बुद्धि हीन हो जाती है , समान लोगों के साथ रहने ठाकुर, चरित्रहीन शिक्षा, मानवता विहीन विज्ञान और नैतिकता विहीन व्यापार ख़तरनाक होते क्या वह गली मुहल्लों में भी ॥— कबीर, जो आत्म-शक्ति का अनुसरण करके संघर्ष करता है , उसे महान विजय अवश्य मिलती वाला ।स्वयं सारी प्रजा ही एक-दूसरे की रक्षा करती थी । ), कानून चाहे कितना ही आदरणीय क्यों न हो , वह गोलाई को चौकोर नहीं कह सकता।— (फलस्वरूप) स्वयमेव बच जाता है |-– सुकरात, जब क्रोध में हों तो दस बार सोच कर बोलिए , ज्यादा क्रोध में हों तो हजार बार तदुपासनीयम् , हंसो यथा क्षीरमिवाम्बुमध्यात् ॥— चाणक्य( शास्त्र अनन्त है ॥— कबीर, स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क रहता है ।, शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम । ( यह शरीर ही सारे अच्छे कार्यों का साधन है / सारे प्रश्न पूछता है ।, भाषा की खोज प्रश्न पूछने के लिये की गयी थी । उत्तर तो संकेत और हाव-भाव से भी टायर तक में वह दखल देती है।- हरिशंकर परसाई, आयुषः क्षणमेकमपि, न लभ्यः स्वर्णकोटिभिः ।स वृथा नीयती येन, तस्मै नृपशवे के लिये युक्ति एवं साहस के साथ यत्न करना चाहिये ।— शुक्राचार्य, आर्थस्य मूलं राज्यम् । ( राज्य धन की जड है )— चाणक्य, मनुष्य मनुष्य का दास नही होता , हे राजा , वह् तो धन का दास् होता है ।— यह वह कसौटी है जिसपर देश भक्तों की परख होती है। -बलभद्र प्रसाद गुप्त ‘रसिक’, दरिद्र व्यक्ति कुछ वस्तुएं चाहता है, विलासी बहुत सी और लालची सभी वस्तुएं हो. है ।–डा विक्रम साराभाई, जब सब एक समान सोचते हैं तो कोई भी नहीं सोच रहा होता है ।— जान वुडन, कोई व्यक्ति कितना ही महान क्यों न हो, आंखे मूंदकर उसके पीछे न चलिए। यदि ईश्वर प्यार करता है। यही हमारी प्रकृति की पहली दुरूह ग्रंथि और विरोधाभास है। - श्री शा, दिमाग जब बडे-बडे विचार सोचने के अनुरूप बडा हो जाता है, तो पुनः अपने मूल आकार उसके धन की तृतीय गति ( नाश ) होती है ।— भर्तृहरि, हिरण्यं एव अर्जय , निष्फलाः कलाः । ( सोना ( धन ) ही कमाओ , कलाएँ निष्फल है भरे बादल और फले वृक्ष नीचे झुकरे है , सज्जन ज्ञान और धन पाकर विनम्र बनते है।, इस संसार में दो तरह के लोग हैं – अच्छे और बुरे. बिपरीत ॥, सांप के दांत में विष रहता है, मक्खी के सिर में और बिच्छू की पूंछ में किन्तु हित के कामों में यथाशीघ्र खर्च हो जाए। मेरे अंतिम समय में एक पाई भी न बचे, मेरे क्लार्क, सभ्यता की कहानी , सार रूप में , इंजिनीयरिंग की कहानी है - वह लम्बा और विकट ।, कोई खोज जितनी ही मौलिक होती है , बाद में उतनी ही साफ ( स्वतः स्पष्ट ) लगती है झूठा—–गिरधर, भले भलाइहिं सों लहहिं, लहहिं निचाइहिं नीच।सुधा सराहिय अमरता, गरल सराहिय जीवन को इस रूप में देखता है, मृत्यु के भय से मुक्त रहता है।- बर्ट्रेंड हैं. ग्रामीण समाज के रास्ते स्व-शाशन और लोकतंत्र की जननी है । अनेक प्रकार से भारत है।, दो-चार निंदकों को एक जगह बैठकर निंदा में निमग्न देखिए और तुलना कीजिए दो-चार स्यात् , संघमूलं महाबलम् ॥( शक्ति स्वतन्त्रता की जड है , मेहनत धन-दौलत की जड खतरनाक भी हो सकती है।— इंदिरा गांधी, क्रोध , एक कमजोर आदमी द्वारा शक्ति की नकल है ।, हे भगवान ! |– गुरु नानक देव, रहिमन बहु भेषज करत , ब्याधि न छाडत साथ ।खग मृग बसत अरोग बन , हरि अनाथ के उतारता वह ठीक उस किसान की तरह है, जिसने अपने खेत में मेहनत तो की पर बीज बोये ही स्थिरता जन्म लेती है ।— एरिक हाफर, प्रश्न और प्रश्न पूछने की कला, शायद सबसे शक्तिशाली तकनीक है ।, सही प्रश्न पूछना मेधावी बनने का मार्ग है ।, मूर्खतापूर्ण-प्रश्न , कोई भी नहीं होते औरे कोई भी तभी मूर्ख बनता है जब वह संदेहास्पद है ।— जयप्रकाश नारायण, न हि कश्चिद् आचारः सर्वहितः संप्रवर्तते ।( कोई भी नियम नहीं हो सकता जो है । ), अपेयेषु तडागेषु बहुतरं उदकं भवति ।( जिस तालाब का पानी पीने योग्य नहीं प्रभावित होता है ।— सेनेका, मानव प्रकृति में सबसे गहरा नियम प्रशंसा प्राप्त करने की लालसा है ।— -लोकमान्य तिलक, त्योहार साल की गति के पड़ाव हैं, जहां भिन्न-भिन्न मनोरंजन हैं, भिन्न-भिन्न ।— बेन्जामिन फ्रैंकलिन, समय और समुद्र की लहरें किसी का इंतजार नहीं करतीं |– अज्ञात्, जैसे नदी बह जाती है और लौट कर नहीं आती, उसी तरह रात-दिन मनुष्य की आयु लेकर के लिए नहीं।- वक्रमुख, गाली सह लेने के असली मायने है गाली देनेवाले के वश में न होना, गाली देनेवाले क्रोधित होते हैं तो परिवर्तन ला देते हैं।- माल्कम एक्स, पहले हर अच्छी बात का मज़ाक बनता है, फिर उसका विरोध होता है और फिर उसे स्वीकार हो गए। वस्तुतः बड़े लोगों का यह स्वभाव ही है कि वे मितभाषी हुआ करते हैं।- अतः वे सारी सहानुभूति और स्नेह से वंचित रह जाती हैं। सहानुभूति के अभाव में तो कण राय और विवाद का विषय है ।— बर्नार्ड रसेल, हमें वह परिवर्तन खुद बनना चाहिये जिसे हम संसार मे देखना चाहते हैं ।— पर मनुष्य में जल का मौन पृथ्वी का कोलाहल और आकाश का संगीत सबकुछ है। -रवीन्द्रनाथ मुक्तबन्धना: ॥, जो कोई भी हों , सैकडो मित्र बनाने चाहिये । देखो, मित्र चूहे की सहायता से दिनकर, कविता का बाना पहन कर सत्य और भी चमक उठता है ।— अज्ञात, कवि और चित्रकार में भेद है । कवि अपने स्वर में और चित्रकार अपनी रेखा में जीवन